ईलैक्ट्रॉनिक्स part 2



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> किसी शुद्ध अर्धचालक पदार्थ मे अशुद्धि मिलाने कि प्रक्रियाअर्थत इन्ट्रिन्सिक को
एक्सट्रिन्सिक मे परिवर्तित करने कि प्रक्रिया अपमिश्रण या मादन (DOPING)
कहलाती है
> त्रिसंयोजि तत्व = इण्डियम,  गैलियम,  एल्युममिनियम,   बोरोन
> चतुसंयोजी तत्व = जर्मेनियम,     सिलिकॉन
> पंचसंयोजी तत्व = फॉस्फोरस,   बिस्मिथ,        आर्सेनिक,  एंटिमनि
> चतुसंयोजी तत्व मे त्रिसंयोजी तत्व कि अल्प मत्रा को उष्मा प्रक्रिया के द्वारा मिलाने
पर P प्रकार के पदार्थ का निर्माण होता है
> चतुसंयोजी तत्व मे पंचसंयोजी तत्व कि अल्प मत्रा को उष्मा प्रक्रिया के द्वारा मिलाने
पर N प्रकार के पदार्थ का निर्माण होता है ।


> जब किसी चतुसंयोजी तत्व मे त्रिसंयोजी तत्व को अपमिश्रित किया जाता है तो मुक्त
इलैक्ट्रॉन के लिये एक खालि स्थन रह जाता जिसे होल या कोटर कहते है।
> P प्रकार के पदार्थ मे कोटर, बहुसंख्यक वाहक होते है तथा मुक्त इलैक्ट्रॉन
अल्पसंख्यक वाहक होते है।
> N प्रकार के पदार्थ मे इलैक्ट्रॉन, बहुसंख्यक वाहक होते है तथा कोटर अल्पसंख्यक
वाहक होते है।
> P-N संधि डायोड मे संधि पर एक विपरीत अवेशित आयनो का एक विधुत क्षेत्र
उत्पन होता जिसे संधि क्षैत्र या रोधिका कहते है
> P-N संधि का वह भाग जहाँ न तो इलैक्ट्रॉन ओर न हि कोटर होते है, वह अवक्षय
क्षेत्र या स्थन आवेश कहलाता है।


> P-N जंक्शन डयोड विधुत धारा का प्रवाह केवल एक हि दिशा मे होने देता है अत
इसका प्रयोग A.C को D.C मे परिवर्तित करने के लिये किया जाता है।
> A.C को D.C मे परिवर्तित करना दिष्टिकरन (रेक्टिफिकेशन ) कहलाता है
> P-N जंक्शन डयोड की अभिनति (बायसिंग) की दो विधियां है 1, अग्र अभिनति
(फॉरवर्ड बायस) 2, पश्र्च अभिनति (रिवर्स बायस)

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