ईलैक्ट्रॉनिक्स part 4



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> LED को प्रचालित करने कि लिये अग्र वोल्टता पतन 1.7 वोल्ट से 3 वोल्ट तक
होता है तथा अग्र धारा का न्युनतम मान 20mA तक व अधिकतम 50mA तक
होता है
> LED को रिवर्स बायस अवस्था में दी जा सकने वली अधिकतम वोल्टेज का मान 8
वोल्ट होता है, इससे अधिक वोल्टेज देने पर LED नष्ट हो जायेगी
> LED  गेलियम, फस्फोरस तथा आर्सेनिक के अपमिश्रण दवारा बनायि जाती है
> LED की विभ्भिन अग्र वोल्ट्ता के अनुसार रंग निर्धारण- लाल=1.8V, नारंगी=2V
पील=2.1V, हरा=2.2V (20mA अग्र धारा पर)


> फोटॉ डायोड एक प्रकाश चालित स्विच है जो प्रकाश किरणे पडने पर अपने प्रतिरोध
को अत्याधिक घटा लेता है तथा किसी परिपथ को ऑन कर देता है
फोटो डयोड कैडियम सल्फाइड नामक यौगिक से बनाया जाता है ।
> एक फोटो डयोड अपनी धारा को नैनो सेकन्ड मे ऑन तथा ऑफ कर सकता है
> जब एक P-N जंक्शन डयोड को संधारित्र की तरह प्रयोग किया जाये तो वह वेरेक्टर
डायोड कहलाता है ।
> सोलर सैल एक एसी युक्ति है जो प्रकाश किरणो को सीधे वि.व.बल मे परिवर्तित कर
देती है
> सोलर सैल मे चांदि का ऐनोड होता है जो सिलिकॉन नामक तत्व की एक अति
महीन पट्टी द्वारा प्रकाश के कारण उत्सर्जित इलैक्ट्रॉन को इकट्ठा करता है।
> सोलर सैल को फोटो डायोड या फोटो वोल्टिक सैल भी कहते है।
> जब सोलर सैल सूर्य के प्रकाशीय किरण के प्रभाव में होते है तो ये लगभग
100mwlcm2 शक्ति देते है।


> सोलर सैल की खुला परिपथ वोल्ट्ता 0.55V के तुल्य होती है ।
> आवश्यक निर्गत वोल्टेज प्राप्त करने के लिये अनेक सोलर सैल को श्रेणीक्रम मे जोडना
चाहिये
> आवश्यक निर्गत धारा प्राप्त करने के लिये अनेक सोलर सैल को सामांतर क्रम मे
जोडना चाहिये
> ए.सी को डी.सी मे परिवर्तित करने वाला परिपथ दिष्कारी परिपथ कहलाता है जो
डायोड से निर्मित होता है।

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