11. विधुत वायरिंग short trick 2



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> किसी भी AC परिपथ में लिकेज धारा का मान 1/5000 वे भाग से अधिक

नहि होना चाहिए।

> किसी भी DC परिपथ में लिकेज धारा का मान 1/2000 वे भाग से अधिक

नहि होना चाहिए।

> मेन बोर्ड को फर्श से 2 मीटर की उंचाई पर लगाना चहिए।

> छत क पंखे की ब्लेड की छत से न्यून्तम दूरी 30 सेमीo (12) होती है।

> प्रत्येक उपकरण के धात्विक भागो अर्थ तार से जोड जाना चहिए।

> फ्यूज एक सुरक्षा युक्ति है, जो परिपथ को शॉट सर्किट तथा अतिभार (

Overload) अवस्था में असामन्यत उच्च धारा से बचाव करती है।

> सिंगल फेज A.c परिपथ में फेज तार लाल या नीले रंग तथा न्यूट्रल तार काले

रंग की होती है।

> तीन फेज ए0सी0 में तीनो फेज तारों के लिए कमश: लाल,पीला, व नीला रंग

रखा जाता है।

> डी0सी0 में धनात्मक तार लाल व ऋणात्मक तार काले रंग की रखी जाती है।

> वायरिंग करने से पूर्व उसका ले – आउट (कच्चा चित्र) तैयार कर लेना चहिए।

> I.E.85 के अंतर्गत सिरोपरि लाईन के दो पेल्स के बीच 67 मीo(220 फुट) से

अधिक दूरी नहि होनी चाहिए।

> किसी भवन में लूपिंग विधि के द्वारा वायरिंग की जानी चाहिए।

> क्लीट वायरिंग एक अस्थायी वायरिंग है।

> दो कलीटो के बीच की दूरी 60 सेमी. से अधिक नहि होनी चाहिए।

> लकड़ी केंसिंग कैपिग टिक (सागौन) की लकडी बनी होनी होती है।

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